सोमवार, 16 सितंबर 2013

उसी वक्त (कृष्णजन्माष्टमी के उपलक्ष में )

सुन सुन कर हैरान हूँ कान्हा ,
तुम उसी वक्त दौड़कर आये
जब द्रोपदी ने 
आर्त स्वर में पुकारा तुम्हे,
चीर बढाकर 
बचा लिया
अपनी बहन का स्वाभिमान ,
तुम्हे शतशः नमन ----
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लेकिन
 सवाल तो बनता है न कान्हा 
आखिर  सर्वेश्वर थे तुम ,
उसी वक्त यदि
द्रोपदी का चीर बढ़ा सकते थे---तो 
उसी वक्त दुशासन के
हाथ भी तो काट सकते थे ना ---जड़ से !!!!!-------

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