बुधवार, 13 जून 2018


माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस पर.---
समय के शिलालेख पर
स्वर्णाक्षरों में उकेरा
एक नाम 'अटल'
महज अक्षरबंध नहीं है,
संचित है
जीवन में सत्कर्मों का
जो सिखाता है
कि प्रतिष्ठा केवल पद से नहीं
सत्कर्मों से अर्जित होती है.......
क्षितिज पर यूं ही नहीं होते
हस्ताक्षर किसी के,
न ही लौह सी जीवटता
और प्रतिनिधित्व का
सामर्थ्य होता है
हर किसी में......
आसान नहीं होता,
हिमालय हो जाना,
गढने होते है विचारों के
अनगिनत कुरूक्षेत्र,
लड.नी होती है
एक समूची महाभारत
अपने आप के साथ,
बिना किसी कृष्ण के भी.....
तुम्हें कोटिश: प्रणाम्
ओ कर्मयोद्धा,
आज तुम कुछ कहो,
या मौन रहो,
हरदम मुखर हो,
हो नींव के पत्थर
फिर भी शिखर हो......
. .. ..... कुन्दा जोगलेकर

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